Generation Of Computer In Hindi

Generation Of Computer In Hindi: नमस्कार दोस्तों ज्ञानवर्ल्ड में आपका एक बार फिर से स्वागत है आज इस आर्टिकल माध्यम से हम कंप्यूटर की पीढ़ियों के बारे में जानेंगे मै हु आप सभी के साथ अजीत ठाकुर चलिए शुरू करते है आज का चैप्टर Generations of Computer.

काफी समय पहले पीढ़ियों का मतलब कंप्यूटर के हार्डवेयर तकनीक में बदलाव से लिया जाता था लेकिन वर्तमान में पीढ़ियों का मतलब Hardware और Software दोनों तकनीक में बदलाव से लगाया जाता है। 

Generation Of Computer In Hindi
Generation Of Computer In Hindi

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देखा जाये तो कंप्यूटर की जनरेशन को 5 भागो में बांटा गया है।

  1. First Generation
  2. Second Generation
  3. Third Generation
  4. Fourth Generation
  5. Fifth Generation
Generation Of Computer In Hindi

प्रत्येक पीढ़ी के कम्पूटरो को  उनके द्वारा उपयोग में ली जाने वाली तकनीक के आधार पर परिभाषित किया गया है।

प्रथम पीढ़ी (First Generation Of Computer) (1942-1956)

पहली पीढ़ी (First Generation) के कंप्यूटर के मुख्य इलेक्ट्रॉनिक घटक Electronic Component  के रूप में वैक्यूम ट्यूबों (Vacuum Tube) एवं डेटा भंडारण (Data Storage) के लिए चुंबकीय ड्रम (Magnetic Drum) का इस्तेमाल किया गया। प्रथम पीढ़ी की समय अवधि 1942 से 1956 तक की थी।

अगर हम Vacuum Tube बात करे तो उस समय की Memory और CPU के ये Basic Components थे। ये Components बहुत जल्दी गर्म हो जाते थे जिसकी वजह से कंप्यूटर भी गर्म हो जाते थे।

First Generation के कंप्यूटर का वजन लगभग 30 टन जितना था और इसका आकर 50X30 मतलब एक कमरे जितना था सीधी बात बोलू तो First Generation के कंप्यूटर का आकर काफी बड़ा होता था जिसे रखने के लिए एक काफी बड़े कमरे की आवश्यकता होती थी।

First Generation के कंप्यूटर में 18000 Vacuum Tubes का प्रयोग किया गया था, इनमे जोड़ करने में 200 Micro Second और गुणा करने में 2000 Micro Second का समय लगता था।

First Generation के कंप्यूटर को चलने  150000 वाट बिजली की आवश्यकता होती थी, इस पीढ़ी के कंप्यूटर को Alternating Current (AC) की आवश्यकता होती थी।

First Generation के कंप्यूटर बहुत महंगे थे इनमे गर्मी का उत्सर्जन बहुत अधिक होता था जिसकी वजह से इन्हे ठंडा करना बहुत जरूरी था साथ ही इनका रखरखाव भी बहुत कठिन था।

Generation Of Computer In Hindi

First Generation के कंप्यूटर को चलाने के लिए मशीनी भाषा (Machine Language) का इस्तेमाल इसकी प्रोग्रामिंग भाषा (Programming Language) के रूप में  किया जाता था। यह Machine Language 0 और 1 पर आधारित होती थी जिसे Binary Language के रूप में जाना जाता है।

First Generation के कंप्यूटर में Punch Card, Paper Tape और Magnetic Tape को Input और Output Device की तरह इस्तेमाल किया जाता था। जिसके कारण इनकी गति काफी काम थी।

 First Generation के कंप्यूटर एक समय में एक ही समस्या को हल करने में सक्षम थे जिसे Single Task Single User भी कहते थे।

प्रथम पीढ़ी के कम्प्यूटर्स में कई कम्प्यूटर्स का निर्माण हुआ जिनके नाम है:-

  1. ENIAC
  2. EDVAC
  3. EDSAC
  4. UNIVAC-I
  5. IBM-701

ENIAC (Electronic Numerical Integrator and Computer) – World’s First Electronic Computer

was eniac the first computer

सर्वप्रथम सम्पूर्ण इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर ENIAC का आविष्कार किया गया जिसे अमेरिका की पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के जॉन मचली तथा जे. प्रेस्पर एकर्ट ने बनाया।

इसे यूनाइटेड स्टेट्स आर्मी के लिए बनाया गया था जो उनकी Artillery (तोपखाने) की फायरिंग टेबल को कैलकुलेट करता था।

EDVAC (Electronic Discrete Variable Automatic Computer) (1956-1965)

edvac computer

1945 में EDVAC के सलाहकार हंगरी के जॉन वॉन न्यूमेन की संग्रहित अनुदेश संकल्पना (Stored Program Concept) के आधार बनाया गया।

इस से पहले कम्पूटरो में प्रोग्राम एवं डाटा संग्रह (Stored) करना बहुत मुश्किल कार्य था।

EDSAC (Electronic Delay Storage Automatic Computer)

edsac computer

EDSAC नामक कंप्यूटर का निर्माण कैंब्रिज विश्वविद्यालय में मई 1949 में किया गया।

UNIVAC-I (Universal Automatic Computer)

UNIVAC-I आकर में काफी बड़े होते थे और इनकी गणना Milli Seconds में की जाती 0थी।

Generation Of Computer In Hindi

प्रथम पीढ़ी के कम्प्यूटर्स की मुख्य विशेषताएं :-

  • प्रथम पीढ़ी के कम्प्यूटर्स में Vacuum Tube Technology का इस्तेमाल किया गया था।
  • बहुत काम विश्वसनीय, Output Result हमेशा गलत आया करता था।
  • प्रथम पीढ़ी के कम्प्यूटर्स केवल Machine Language को support करते थे
  • यह Computer बहुत महंगे होते थे।
  • ये बहुत जल्दी गर्म हो जाते थे।
  • Processing काफी धीमी थी।
  • इनका साइज (Size) काफी बड़ा था
  • इस Machine को ठंडा रखने के लिए AC का इस्तेमाल किया जाता था।
  • यह कम्प्यूटर्स Portable नहीं थे, किसी भी एक स्थान से दूसरे स्थान पर लेकर जाना काफी मुश्किल भरा काम था।
  • इनमे बहुत ज्यादा इलेक्ट्रिसिटी का इस्तेमाल होता था।

द्वितीय पीढ़ी (Second Generation Of Computer) (1956-1965)

  • द्वितीय पीढ़ी (Second Generation) के कंप्यूटर में इलेक्ट्रॉनिक घातक (Electronic Component) के रूप में ट्रांसिस्टर (Transistor) का इस्तेमाल किया गया था।
  • ट्रांजिस्टर एक सॉलिड स्टेट युक्त (Solid State Device) है जो अर्द्धचालक धातु (Semiconductor Metal) से बानी होती है। यहाँ ट्रांजिस्टर का वही कार्य है, जो प्रथम पीढ़ी के कम्पूटरो में वैक्यूम ट्यूब का था।
  • Transistor का आकर Vacuum Tube की तुलना में बहुत छोटा था और इनमे बिजली (Electricity) की खपत भी बहुत कम थी।
  • प्रथम पीढ़ी की तुलना में, ये अधिक विश्वनीय (Reliable) व अधिक तीव्र (Fast) गति से कार्य करने में सक्षम थे।
  • इस पीढ़ी में Magnetic Cores को Primary Memory के रूप में इस्तेमाल किया गया था।
  • Magnetic Tape और Magnetic Disk को Secondary Memory के लिए उपयोग किया गया था।
  • द्वितीय पीढ़ी के कम्प्यूटर्स में Assembly व Machine Language को और अधिक आसान व ताकतवर बना दिया गया।
  • इसी दौर में Programming Language का भी आविष्कार हुआ था। जिनमे मुख्य रूप से कोबोल (COBOL) और फोरट्रान (FORTRAN) नामक उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषाएँ (High Level Language) इसी पीढ़ी में शुरू की गयी थी।
Second Generation Of Computer

द्वितीय पीढ़ी में कई कम्पूटरो का निर्माण हुआ जिनके नाम है :-

  • IBM 7030
  • Honeywell 400
  • CDC 1604

द्वितीय पीढ़ी के कम्प्यूटर्स की मुख्य विशेषताएं :-

  • इनमे Transistor का उपयोग किया गया था।
  • ये First Generation के Computer से ज्यादा Accurate थे।
  • इन कंप्यूटर का साइज पहली जनरेशन के कंप्यूटर से छोटा था।
  • First Generation Computer के मुताबिक इनका तापमान काम होता था।
  • Electricity की बात करे तो कम से कम इस्तेमाल होती थी।
  • Processing काफी तेज हुआ करती थी।
  • इस दौर में भी यह कम्प्यूटर्स काफी महंगे हुआ करते थे।
  • AC की जरूरत अभी भी थी इनके गर्म होने के कारण।
  • Cobol और Fortran जैसी उच्चस्तरीय प्रोग्रामिंग भाषाओ का विकास हुआ।
  • संग्रहण डिवाइस (Storage Device), प्रिंटर और ऑपरेटिंग सिस्टम आदि का प्रयोग हुआ।

तृतीय पीढ़ी (Third Generation of Computer) (1965-1975)

  • तृतीय पीढ़ी (Third Generation) के कंप्यूटर में ट्रांजिस्टर (Transistor) के स्थान पर इंटीग्रेटेड सर्किट (Integrated Circuit) का इस्तेमाल किया गया था।
  • 1958 में Jack Kilby और Robert Noyce ने प्रथम बार ट्रांसिस्टर के स्थान पर Integrated Circuit (IC) का इस्तेमाल किया जो Transister, Registers और Capacitors का समूह था। जिसके कारण कंप्यूटर के आकर को और अधिक छोटा बनाया जा सका।
  • Integrated Circuit (IC) चिप सिलिकॉन की बनी होती है, IC में पहले 10-20 इलेक्ट्रॉनिक उपकरण आते थे तथा इस तकनीक को Small Scale Integration (SSI) कहा गया। 
  • समय के साथ धीरे धीरे IC में लगभग 100 इलेक्ट्रॉनिक उपकरण  को शामिल कर दिया गया और इसे Medium Scale Integration (MSI) नाम दिया गया।
  • तृतीय पीढ़ी में अधिकतर Storage वाली Magnetic Tapes और Magnetic Disks का प्रयोग किया गया।
  • इस पीढ़ी के कम्पूटरो द्वारा इनपुट/आउटपुट के कीबोर्ड  मॉनिटर का इस्तेमाल किया गया था।
  • इस पीढ़ी में MICR, Plotters और Scanners का आविष्कार किया गया।
  • साथ ही इस  समय साझा (Time Sharing) और बहु प्रोग्रामिंग ऑपरेटिंग सिस्टम (Multi Programming Operating System) की अवधारणा को पेश किया गया था।
  • कई नयी उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषाओ की शुरुवात इस पीढ़ी में हुई जैसे – पास्कल (Pascal), बेसिक (Basic), फोरट्रान (Fortran) – II, III, IV
Third Generation of Computer

तृतीय पीढ़ी कई कम्पूटरो का निर्माण हुआ  जिनके नाम है।

  • IBM-360
  • IBM-370
  • CDC-6600
  • PDP-8
  • PDP-11

तृतीय पीढ़ी के कम्प्यूटर्स की मुख्य विशेषताएं :-

  • इनमे Integrated Circuit का इस्तेमाल हुआ था।
  • ये ज्यादा Accurate और विश्वनीय थे।
  • Size में काफी छोटे थे पिछली दो पीढ़ीओ से।
  • काम तापमान उत्पन्न  करते थे।
  • आउटपुट की गति काफी तेज थी।
  • काम रख रखाव की आवश्यकता थी।
  • इस पीढ़ी के कंप्यूटर महंगे होते थे।
  • AC की आवश्यकता होती थी ताकि कम्प्यूटर्स गर्म न हो।
  • Electricity की खपत कम होती थी।
  • High Level Language का उपयोग हुआ था

चतुर्थ पीढ़ी (Fourth Generation Of Computer) (1975-1989) 

  • चतुर्थ पीढ़ी में माइक्रोप्रोसेसर (Microprocessor) की शुरुवात हुई जिनमे हजारो आईसी एक चिप पर निर्मित की जा सकती थी।
  • लगभग 5000 Transistor को एक साथ जोड़कर Large Scale Integration (LSI) का निर्माण किया गया समय के साथ इसी LSI का विस्तार Very Large Scale Integration (VLSI) के रूप में कर दिया गया।
  • इन परिपथों में एक इंच के चौथाई भाग  ट्रांसिस्टर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक घातक समाए होते है, अतः इन परिपथों को माइक्रोचिप कहा जाने लगा।
  • पहला माइक्रोचिप 1971 में इंटेल कॉर्पोरेशन ने Intel-4004 तैयार किया। इस छोटे से चिप को माइक्रोप्रोसेसर कहा जाने लगा। माइक्रोप्रोसेसर युक्त कंप्यूटर को ही माइक्रो कंप्यूटर कहा जाता है।
  • इस पीढ़ी के कंप्यूटर में Storage Device को Computer में ही समाहित कर दिया गया जिससे Computer का आकार बहुत ही कम हो गया और इसी कारण पर्सनल कंप्यूटर घर  पाए।
  • इस पीढ़ी में, समय  बटवारे (Time Sharing) की अवधारणा, वास्तविक समय प्रसंस्करण (Real Time Networks), डिस्ट्रिब्यूटेड ऑपरेटिंग सिस्टम (Distributed Operating System) का इस्तेमाल किया गया था।
  • चतुर्थ पीढ़ी में नयी उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषाओ (High Level Language) के रूप में C, C++, DBASE (डेटाबेस) का इस्तेमाल किया गया।
  • CRAY जैसे SUPER COMPUTER का जन्म भी इसी पीढ़ी में हुआ जो एक सेकंड में लगभग 1 अरब (ONE BILLION) गणनाये कर सकता था।
Fourth Generation Of Computer
Generation Of Computer In Hindi

चतुर्थ पीढ़ी में कई कम्पूटरो का निर्माण हुआ जिनके नाम है :-

  • CRAY-I
  • CRAY-II
  • APPLE-II
  • VAX-9000

चतुर्थ पीढ़ी के कम्प्यूटर्स की मुख्य विशेषताएं :-

  • VERY LARGE SCALE INTEGRATION (VLSI) तकनीक का उपयोग हुआ था।
  • इस पीढ़ी के कंप्यूटर सस्ते हो चुके थे।
  • PORTABLE और RELIABLE होने के कारण इनकी DEMAND MARKET ने ज्यादा हुआ करती थी।
  • PERSONAL COMPUTER का दौर आया।
  • इनके आकार पहली दूसरी और तीसरी GENERATION के कंप्यूटर से छोटे थे।
  • अधिक मेमोरी छमता।
  • कंप्यूटर के विभिन्न नेटवर्क का विकास।

पांचवी पीढ़ी (Fifth Generation Of Computer) (1989 से अब तक)

पांचवी पीढ़ी के रूप में, एक नयी तकनीक उभर कर आयी जिसे ULTRA LARGE SCALE INTEGRATION (ULSI) कहा जाता था। जिसके अंतर्गत माइक्रोप्रोसेसर चिप में 10 लाख तक उपकरणों को शामिल किया जा सकता था।

इस पीढ़ी में कृत्रिम बृद्धि (ARTIFICIAL INTELLIGENCE) की अवधारणा, वोइस रिकॉगनिशन, मोबाइल संचार, सेटेलाइट संचार, सिग्नल डाटा प्रोसेसिंग को आरम्भ किया गया।

उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषाओ में JAVA, VB और .NET की शुरुवात इस पीढ़ी में हुई।

आज के कंप्यूटर इतने उन्नत है की वे हर विशिष्ट क्षेत्र, मूल रूप से एकाउंटिंग, इंजीनियरिंग, भवन निर्माण, अंतरिक्ष तथा दूसरे प्रकार के शोध कार्य में उपयोग किये जा रहे है।

इस पीढ़ी में प्रतिदिन कंप्यूटर के आकार को घटाने का प्रयास किया जा रहा है जिसके फलस्वरूप हम घडी के आकार में भी कंप्यूटर को देख सकते है। इंटरनेट की सहायता से हम दस्तावेज, सूचना तथा पैसे का आदान प्रदान कर सकते है।

पांचवी पीढ़ी में कई कम्पूटरो का निर्माण हुआ जिनके नाम है:-

  • IBM
  • NOTE BOOK
  • PARAM
  • PENTIUM

Generation Of Computer In Hindi

कम्पूटरो का विभिन्न आकार में उपलब्ध होना :-

जैसे डेस्कटॉप (DESKTOP), लैपटॉप (LAPTOP), पाल्म्टॉप (PALMTOP) आदि।

इंटरनेट :- यह कंप्यूटर का एक अंतर्राष्ट्रीय संजाल है। जिसमे दुनिया भर के कंप्यूटर नेटवर्क इंटरनेट से जुड़े होते है। इस तरह हम कही से भी घर बैठे – अपने स्वास्थ्य, चिकित्सा, विज्ञान कला और संस्कृति आदि लगभग सभी विषयो पर विविध सामग्री इंटरनेट पर प्राप्त कर सकते है।

मल्टीमीडिया :- ध्वनि (SOUND), दृश्य (GRAPHICS) या चित्र और पाठ (TEXT), के सम्मलित रूप से मल्टीमीडिया का इस पीढ़ी में विकास हुआ है।

नए अनुप्रयोग (NEW APPLICATIONS)

कंप्यूटर की तकनीक अतिविक्सित होने के कारण इसके अनुप्रयोगों का उपयोग फिल्म निर्माण, यातायात नियंत्रण, उद्योग, व्यापार और शोध आदि के क्षेत्र में हुआ है।

नमस्ते मेरा नाम अजीत ठाकुर ज्ञानवर्ल्ड में आपका स्वागत है, मै पिछले 4 सालो से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर टीचर हूँ और साथ ही ज्ञानवर्ल्ड वेबसाइट का लेखक हूँ। मेरा उद्देशय और इस वेबसाइट के माध्यम से ज्ञानवर्धक जानकारियां उपलब्ध करवाना है जो विभिन्न विषयो में आपका ज्ञान बढ़ाएगी। उम्मीद करता हूँ आपको यह एजुकेशनल वेबसाइट पसंद आएगी

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This Post Has 6 Comments

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