Mithilesh Kumar Srivastava Biography

Mithilesh Kumar Srivastava Biography: आज मै ऐसे व्यक्ति की कहानी बताने जा रहा हु जिसके बारे में आपने सुना होगा और आपको आश्चर्य भी हुआ होगा आज मै आपको नटवरलाल की कहानी बताने जा रहा हू जिन्हे उनके गाँव में Mr. नटवरलाल के नाम से जाना जाता है इन्होने अपनी ज़िंदगी में तीन बार ताज महल को बेच दिया एक नहीं दो नहीं जी हा तीन बार चलिए जानते है कैसे

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Mithilesh Kumar Srivastava Biography

बिहार की राजधानी पटना से लगभग 150 किलोमीटर दूर एक गाँव है जिसका नाम जीरादेवी है इस गाँव को हम सभी आज़ाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के गोअन के नाम से भी जानते है जीरादेवी बिहार के सीवान जिले में स्तिथ है

मिथलेश कुमार श्रीवास्तव उर्फ़ Mr. नटवरलाल का जन्म वर्ष 1912 में जीरादेवी के निकट बँगरा गाँव में हुआ था अपने भाई बहनों में वो सबसे बड़े थे और वकालत की पढ़ाई भी पूरी कर चुके थे उनकी ज़िंदगी एक आम इंसान की तरह चल रही थी लकिन एक दिन नटवरलाल के पडोसी ने उन्हें बैंक का एक डिमांड ड्राफ्ट दिया और बोला मिथलेश जाओ और बैंक से मेरे लिए पैसे निकाल कर ले आओ

मिथलेश ने डिमांड ड्राफ्ट देखा और ठीक उसी तरीके के हस्ताक्षर करने की कोशिश की बाद में उसने देखा की हस्ताक्षर तो बिलकुल एक जैसा हो गया यही से नटवरलाल का खुरापाती दिमाग चला और नटवरलाल ने पडोसी के बैंक से 4000 रूपए और निकाल लिए

Mithilesh Kumar Srivastava Biography: जब खाताधारक को इस बात की जानकारी हुई तब उसने बैंक मैनेजर से इसकी शिकायत की, जवाब में मैनेजर ने बताया कि ये वही लड़का है जिसे आपने पहले पैसे लेने के लिए भेजा था अब पडोसी समझ गया था की ये मिथलेश का ही काम है यहाँ से सुरुवात होती है मिथलेश से Mr. नटवरलाल बन ने की कहानी

इस वारदात को अंजाम देने के बाद नटवरलाल घर से भाग कर कोलकाता चला गया वहां वो पढाई भी करता साथ ही एक सेठ के बेटे को ट्यूशन भी पढ़ा रहा था किसी जरुरी काम के लिए जब नटवरलाल ने सेठ से पैसे मांगे तो सेठ ने उसे पैसे नहीं दिए

Natwarlal Biography in Hindi

इस बात से नटवरलाल को बहुत दुःख हुआ और उसने सेठ को सबक सिखाने का फैशला किया और सेठ के कॉटन के बिज़नेस में लगभग 4 लाख का चूना लगाया और फिर कोलकाता से भाग गया

अब नटवरलाल का नौकरी करने का मन बिलकुल भी नहीं था क्यूंकि अब उसने एक नयी दुनिया को देख लिया था नकली हस्ताक्षर करना उसके बाएं हाथ का खेल था और वो इस खेल का बहुत ज्यादा चालाक खिलाडी और यही उसकी ताकत बन गया

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साथ में वकालत की पढ़ाई की वजह से नटवरलाल को अंग्रेजी बोलना और भेष बदलना बखूबी अच्छे तरीके से आता था साथ ही वो अखबारों की मदद से दुनिया भर के घटनाओ पे अपना ध्यान अधिक केन्द्रित करता था

इसके बाद नटवरलाल ने कई घटनाओं को अंजाम दिया लेकिन कुछ मामले हैं जिनसे वो सामने आ गया कुछ मशहूर घटनाओ को हम आपके सामने प्रदर्शित करते है

ये उस समय की बात है जब केंद्र में नारायण दत्त तिवारी वित्त मंत्री थे और और राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे दिल्ली के दिल में स्तिथ कन्नोत प्लेस में सुरेंद्र शर्मा की घडी की दूकान में नटवरलाल जाता है और खुदको वित्त मंत्री का P.S. मतलब पर्सनल सेक्रेटरी बताता है और कहता है की कल प्रधानमंत्री राजीव गांधी कुछ विदेशी मेहमानों के साथ मीटिंग करने वाले है और साथ में दावत भी होगी

Natwarlal ki Kahani

दावत के बाद प्रधानमंत्री उन सभी मेहमानो को घडी देना चाहते है तो मुझे आपकी दूकान से 93 घडिया चाहिए दुकानदार को पहले तो नटवरलाल की बातों पर शक हुआ लेकिन प्रधानमंती के नाम और इतनी सारी घड़ियों को बेचने के लालच से खुदको रोक न पाया

अगले दिन नटवरलाल घडी लेने दुकान पंहुचा दुकानदार को घड़ियों को पैक करने की बात कहकर नटवरलाल दूकान से एक दुकान के स्टाफ को अपने साथ नार्थ ब्लॉक में ले गया नार्थ ब्लॉक वो जगह होती जहां प्रधानमंत्री जैसे बड़े बड़े अफसर काम करने आते है

वहां नटवरलाल ने भुगतान की राशि के तौर पर दुकान वाले को 32800 रूपए का बैंक ड्राफ्ट दिया 2 दिन बाद जब दुकान वाले ने जब बैंक में ड्राफ्ट जमा करवाया तो पता चला वो ड्राफ्ट नकली था

Mithilesh Kumar Srivastava Biography: फिर दुकानदार को समझ आया की वो आदमी नटवरलाल था और उसका चूना लग चुका है इस घटना को अंजाम देने के बाद वो कभी नहीं रुका ठग्ग करने में नटवरलाल इतना शातिर था कि उसने 3 बार ताज महल 2 बार लाल क़िला एक बार राष्ट्रपति भवन और एक बार संषद भवन तक को बेच दिया था

राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के फर्जी हस्ताक्षर करके नटवरलाल ने संसद भवन को उस समय बेचा था जिस समय संसद में सभी सांसद मौजूद थे कहा जाता है कि नटवरलाल के 50 नाम थे उसी में से एक था नटवरलाल और इसी नाम से वो मसहूर भी और इसी नाम से उन्हें दुनिया जानती है

Natwarlal Ki Kahani Hindi Mein

अब सवाल ये आता है कि इन इमारतों को नटवरलाल बेचता कैसे था और इन्हे खरीदता कौन था

तो दोस्तों मैं आपको बताना चाहता हु कि नटवरलाल इन सभी इमारतों को सरकारी अफसर बनकर बेचता था और खरीदने वालों में ज्यादातर विदेशी होते थे नटवरलाल किसी रहीस विदेशी को ढूंढ़ता और इन्हे बेचने का प्रस्ताव देता साथ ही वो इमारतो से जुड़े सभी कागजात भी तैयार रखते थे सभी कागज़ बाकायदा सरकारी स्टाम्प के साथ होते थे जिसमे ओपन स्पेस बिल्डिंग एरिया स्पेस गार्डन हाल आदि सभी का ब्यौरा शामिल होता था साथ ही संबंधित अधिकारी के हस्ताक्षर भी जो वो खुद ही करता था ये देखकर विदेशी को भी विश्वास हो जाता था और वो डील करने को भी तैयार हो जाते थे

अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि नटवरलाल ने किस किस को चुना लगाया

तो दोस्तों मैं आपको बताना चाहूंगा कि नटवरलाल ने किस किस को चुना लगाया ये रिकार्डेड तो नही है लेकिन नटवरलाल ने ठग करने के मामलो में देश के बड़े बड़े नेताओ और जाने माने उद्योगपतियों को भी चूना लगाया कभी समाज सेवक के नाम से कभी NGO के नाम से कभी किसी और बहाने से

इन नामों में कुछ लोगो के नाम शामिल है जिसमे धीरू भाई अम्बानी रतन टाटा और बिरला जैसे नाम है इतनी सारी घटनाओं को अंजाम देने के बाद नटवरलाल अखबारों की सुर्खियों में आने लगा था जिसे देखकर उसे खुद पर गर्व होता था

नटवरलाल ने अपने जीवन काल में लगभग 8 राजयो में ठगी को अंजाम दिया जिसमे बिहार उत्तर प्रदेश पश्चिम बंगाल दिल्ली हैदराबाद मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र आते है

Mithilesh Kumar Srivastava Documentary

अब जानते है नटवरलाल की गिरफ्तारी कैसे हुई जब नटवरलाल का नाम आम लोगो में फैलने लगा तो बिजनेसमैन खासतौर पर सचेत रहने लगे थे ऐसे ही उसकी गिरफ्तारी कानपूर में हुई थी जब वो एक ज्वेलरी की दुकान में खरीदारी करने गया था वो अपना तिगड़म लगा ही रहा था कि दुकानदार को शक हो गया उसने नटवरलाल को उलझाया और पुलिस को फ़ोन कर दिया

Mithilesh Kumar Srivastava Biography: फिर पुलिस आई और और नटवरलाल गिरफ्तार हो गया नटवरलाल के लिए कितने मुक़दमे दर्ज हुए और उन्हें कितनी सजा हुई होंगी आप ये बात जानेंगे जानेंगे तो आपकी ऊँगली दातों तले आ जाएगी

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पूरे देशभर से नटवरलाल पर लगभग 150 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए जिनमें से केवल 9 मुक़दमे का ही फैसला आया था अलग अलग फैसलो को जोड़कर देखा जाये तो उन्हें 109 सालों की सजा हुई थी जिसमे से उन्हें एक मामले में ही बेल दी गयी थी और बाकि हर बार वो जेल से भागे ही थे उन्होंने अपनी सजा में केवल 20 साल ही जेल में गुजारे थे

नटवरलाल का लखनऊ जेल का एक किस्सा काफी ज्यादा मशहूर है ये बात तब की है जब नटवरलाल लखनऊ की जेल में बंद थे उसी दौरान गाँव से उनकी पत्नी की चिट्ठी आती थी नियम के अनुसार जेल में आने वाली और जेल से जाने वाली चिट्ठी जेल के अधिकारी पहले पढ़ते है फिर चिट्ठी को जेल से अंदर या बाहर ले जाने की अनुमति होती है

How Natwarlal Sold Taj Mahal

लखनऊ में नटवरलाल के नाम से सात आठ चिठियाँ आ चुकी थी लेकिन नटवरलाल ने अबतक एक भी चिट्ठी का जवाब नहीं दिया था अधिकारी के द्वारा बताया गया की चिट्ठी में पैसो की तंगी और खेती बाड़ी के बारे में लिखा होता था

अगली चिट्ठी जब आयी तो जेलर ने नटवरलाल को खुद जाकर चिट्ठी दी और बोला तुम्हारी पत्नी अबतक कितनी चिट्ठी लिख चुकी है लेकिन तुमने अबतक उसकी किसी भी चिट्ठी का जवाब नहीं दिया है ऐसा क्यों यह सुनकर नटवरलाल ने जवाब दिया की शाब मै तो जवाब देना चाहता ही नहीं था लेकिन आप खुद आये है और कह रहे है तो मैं जवाब जरुर दूंगा

नटवरलाल ने जेलर के कहने पर खत लिखा और जेल के डाक खाने में डाल दिया जब अधिकारी ने उस चिट्ठी को पढ़ा तो उस चिट्टी में लिखा था की उसने अपने खेत के किसी एक कोने में गहने और पैसे गाडे हुए है हो सके तो वो निकाल लेना और अपना जीवन अच्छी तरह से जीना

Mithilesh Kumar Srivastava Biography: यह पढ़कर जेल अधिकारी के कान खड़े हो गए और उसने तुरंत उसके गाँव के लोकल पुलिस स्टेशन में फ़ोन किया और मामले की जानकारी दी लोकल पुलिस पुलिस फ़ौरन खेत पहुची और खुदाई चालू करदी लगभग पूरा खेत खोदने के बाद पुलिस को कुछ भी हाथ नहीं लगा और वो सभी मायूस होकर वापस आ गए

अगले दिन नटवरलाल ने फिर से एक चिट्ठी लिखी उस उसमे लिखा की जेल में रहकर मैं तुम्हारी इतनी ही मदद कर सकता हु अब शायद खेत तैयार हो गया हो गया होगा फसल की बुआई कर देना

Natwarlal Ki Kahani Hindi Mein

चिट्ठी पढ़कर जेल अधिकारी दंग रह गया और उन्होंने नटवरलाल के दिमाग की दाद दी और उनकी सराहना भी की खैर यह किस्सा अब सोशल मीडिया पर काफी पुराना हो चूका है लेकिन लखनऊ की जेल में ये अबतक रिकार्डेड है

दोस्तों नटवरलाल इतना होशियार था की उसने कोर्ट के जज को भी आश्चर्यचकित कर दिया अबतक नटवरलाल एक प्रचलित नाम हो चूका था सब उनकी चालाकी के कायल हो चुके थे ऐसे ही एक सुनवाई के बाद कोर्ट में जज ने पूछा तुम ये सब कर कैसे लेते हो

जवाब में नटवरलाल ने कहा अगर आप मुझे एक रूपए देंगे तो मै आपको बताउंगा जज साहब ने नटवरलाल को एक रूपए दिया फिर नटवरलाल ने कहा की मै कोई ठगी या चोरी नहीं करता हु मै लोगो से पैसे मांगता हु और वो मुझे दे देते है मैंने आजतक किसी को धोका नहीं दिया और न ही किसी को कोई नुक्सान पहुंचाया है

चलिए अब जानते है नटवरलाल अपने गाँव में Mr. नटवरलाल कैसे बना तो दोस्तों इतने सारे कारनामों को अंजाम देने के बाद नटवरलाल एक दिन गाडियो के काफिले साथ जब अपने गाँव आये तो नटवरलाल ने पूरे गाँव के लिए एक पार्टी का आयोजन किया इस पार्टी में अनेक तरह के पकवान बनाए गए थे और पार्टी के बाद नटवरलाल ने सभी को 100 रूपए भेंट के रूप में दिए इस वजह से नटवरलाल अपने गाँव का चाहिता बन गया

दुनिया भले ही नटवरलाल को ठग या चोर बुलाये लेकिन नटवरलाल अपने गाँव वालों के लिए मसीहा था इसलिए लोग सम्मान से नटवरलाल को Mr. नटवरलाल के नाम से पुकारते है

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नटवरलाल को वर्ष 1996 से दिल्ली के रेलवे स्टेशन पर देखा गया था जब वो व्हील चेयर पर पुलिस वालो को चकमा देकर भाग गया था उसके बाद से किसी ने अबतक नटवरलाल को नहीं देखा

Mithilesh Kumar Srivastava Biography: दोस्तों सोचिये नटवरलाल अगर आज होते तो कैसे होते कहा जाता है इंसान और वक़्त की तुलना एक साथ नहीं करनी चाहिए जब नटवरलाल आज से 40-50 साल पहले ऐसे कारनामे करते थे तो सोचिये आज के दौर में वो टेक्नोलॉजी के माध्यम से क्या कुछ नहीं कर सकते थे नटवरलाल जैसे ठग न कभी देखा है न कभी देखेगा

वर्ष 2009 में नटवरलाल की फैमिली ने नटवरलाल के लिए कोर्ट में अर्जी दी कि नटवरलाल अब इस दुनिया में नहीं रहे इसलिए अब उनकी सारी फाइल्स बंद करदी जाये लेकिन कोर्ट को तो अब भी सबूत चाहिए लेकिन हमारा कानून ये नहीं जानता कि नटवरलाल के जन्म के अब 108 साल होने वाले है

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