Playing It My Way Book Review

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Playing It My Way Book Review: नमस्कार दोस्तों कैसे है आप सभी दोस्तों सचिन तेंदुलकर को हम सभी जानते है लेकिन सचिन तेंदुलकर के बचपन से उनके क्रिकेट कर्रिएर के बिच की कुछ ऐसी बाते और किस्से है जिनसे हम सभी अपरिचित है और आज मै आप सभी के साथ यही किस्से साझा करने वाला हु

और मै जो ये किस्से बताने वाला हु इनमे कही न कही वो कुछ कारण भी है जिसने साधारण से मिडिल क्लास की फॅमिली से होने के बावजूद भी सचिन को भारत का ही नहीं विश्व का महान क्रिकेटर बनाया और दोस्तों क्या पता है आपको सचिन के जीवन के ये किस्से मुझे खुद सचिन ने बताये है हैरान हो गए मै ये किस्से जान पाया हु सचिन तेंदुलकर द्वारा लिखी ऑटोबिओग्रफ़िकल किताब PLAYING IT MY WAY से तो दोस्तों आइये जानते है उन किस्सों को जिन्हे सचिन तेंदुलकर ने खुद लिखा है।

HOW SACHIN GOT INTO CRICKET

सचिन बचपन से ही काफी ज्यादा शरारती थे अपने कॉलोनी के लोगो पर अपने घर के चौथे मंज़िल से पानी डालना, आम के पेड़ो के बागानों से आम चुराकर खाना, लोगो को उनके फ्लैट में कुण्डी लगाकर उन्हें अंदर बंद कर देना ये सभी चीजे उनके बचपन के खेलकूद का एक हिस्सा थे आस पास के लोग सचिन की इन सैतानिओ की कम्प्लेन उनके घर में भी किया करते थे लेकिन इन कम्प्लेन का सचिन पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ता था।

एक दिन ऐसा हुआ जिसमे सचिन को अपने भाई को लेकर एक जरूरी फैशला लेना पड़ा, रविवार का दिन था कॉलोनी के सभी लोग दूरदर्शन टीवी चैनल पर आ रही गाइड फिल्म देख रहे थे।

सचिन और उनके दोस्त सुनील और अविनाश कॉलोनी के शांत माहौल का फायदा उठाकर पोहोच गए आम के एक बगीचे में जहा बोहोत ही बेहतरीन आम लगे हुए थे आम तोड़ते हुए सचिन और सुनील पेड़ की एक शाखा पर चढ़ गए जिसके चलते वो पेड़ की शाखा उनका वजन नहीं उठा पायी और टूट गयी।

Playing It My Way Book Review

और फिर क्या था सचिन और सुनील बोहोत ऊपर से निचे गिरे जिसके कारण बोहोत आवाज़ हुई और सब आस पास के लोगो ने आकर उनको पकड़ लिया अब उनके परिवार वाले खासकर उनके बड़े भाई जो उनकी बढ़ रही शरारतो से पहले की काफी परेशान थे तो उनके भाई ने उनकी शरारतो वाले दिमाग को किसी स्पोर्ट्स में लगाने का सोचा।

फिर क्या था उनके बड़े भाई ने उन्हें मुंबई के एक बोहोत ही फेमस क्रिकेट कोच RAMAKANT ACHREKAR CRICKET ACADEMY में ज्वाइन करवाने का सोचा और आपको क्या लगता है मुंबई के इतने फेमस क्रिकेट कोच और क्रिकेट अकाडेमी में इतनी आसानी से सचिन जैसे नटखट स्टूडेंट की एंट्री हो गयी।

Playing It My Way Summary

वो क्रिकेट अकादमी जिस से सच में सचिन के क्रिकेट कर्रिएर की शुरुवात हुई वह एडमिशन के सिलेक्शन वाले दिन सचिन को रिजेक्ट कर दिया गया, वो तो उस दिन उनके भाई का पोसिटिव ऐटिटूड जिसमे उन्होंने न नहीं सुनी और कोच के रिजेक्शन के बाद उन्होंने एक और चांस देने के लिए कहा जिसकी वजह से सचिन सच में अपने क्रिकेट कर्रिएर की शुरुवात कर सके।

और बाद में जाकर जिसने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया जब वो भारत के जाने माने महान क्रिकेटर बने।

किस्सा कुछ यु था सचिन के भाई अजीत तेंदुलकर जब सचिन को ACHREKAR सर की अकादमी में जब ट्रायल के लिए लेकर गए वह जब सचिन बस 11 साल के ही थे और पहली बार क्रिकेट खेला जिसमे बोहोत सरे लोग और कोच ACHREKAR सर उन्हें देख रहे थे वैसे सचिन अच्छा क्रिकेट खेलते थे लेकिन सचिन उस दिन अच्छा क्रिकेट नहीं खेल पाए।

और ट्रायल के बाद जब ACHREKAR सर की जब अजित तेंदुलकर से बात हुई तो उन्होंने ये कहकर मना कर दिया की सचिन अभी बोहोत यंग है और कुछ समय बाद वो उनको दुबारा लेकर आये अभी फिलहाल उनको क्रिकट अकादमी ज्वाइन नहीं करवाया जा सकता।

Playing It My Way Online Read

अब सचिन का क्रिकेट कर्रिएर शुरू होने से पहले ही ख़तम होने को था जब अजीत ने कोच ACHREKAR सर की न को एक्सेप्ट नहीं किया और उन्होंने बताया की सचिन बोहोत अच्छा खेलते है और ट्रायल का वातावरण होने के कारण वो अपना सच का असली गेम नहीं दिखा पाए। और अजीत ने उन्हें मानाते हुए कहा की सचिन को एक और मौका दिया जाये, और साथ ही अजीत ने एक और विनती की के जब सचिन खेल रहे हो तो ACHREKAR सर वहा से जाने का नाटक करे, और दूर से सचिन का गेम देखे और सचिन की काबिलियत को समझे।

और तब जब सचिन खेले तो ऐसा खेले की ACHREKAR सर सचिन को अपनी अकादमी में ज्वाइन करवाने के लिए तैयार हो गए और RAMANAKANT ACHREKAR सर की क्रिकेट अकादमी ज्वाइन होने के बाद ही सचिन के क्रिकेट की असली शुरुवात हुई।

BEING STUBBORN FROM CHILDHOOD

सचिन अपने बचपन का एक बोहोत ही रोमांचित किस्सा बताते है जिसके माध्यम से वो फंस को बताना चाहते है की कैसे वो बचपन से ही काफी जिद्दी थे जिस चीज़ को पाने की सोच लेते थे उसको लेकर ही छोड़ते थे।

सचिन के सभी दोस्तों के पास साइकिल थी और सचिन के पास नहीं थी तो उन्होंने अपने पिता को साइकिल दिलवाने के लिए कहा उनके पिता जिसमे पूरा परिवार जिसमे चार बच्चे शामिल थे सबकी जरूरतों का ध्यान रखना होता था तो उनके पिता ने कुछ समय बाद घर के हालत ठीक होने के बाद उन्हें साइकिल दिलवाने को बोला।

Playing It My Way Book summary in hindi

लेकिन कुछ समय बाद भी उनके पापा ने जब उन्हें साइकिल नहीं दिलवाई तो सचिन ने अपने माता पिता को गिलटी फील करवाने के लिए और प्रेशर में डालने के लिए बहार खेलने जाना ही छोड़ दिया करीब एक हफ्ता सचिन शाम को कहने के बजाय बस मुँह बनाकर घर की बालकनी में खड़े रहते थे उस समय सचिन उम्र और हाइट दोनों में छोटे थे और बालकनी के ऊपर से बहार का नजारा नहीं देख सकते थे।

तो एक दिन सचिन ने बालकनी के अंदर सर घुसकर देखने की कोशिश की और तब क्या था सचिन का सर उस ग्रिल में फस गया सचिन के माता पिता जब बहार आये तो सचिन को देखकर बोहोत घबरा गए।

काफी मुश्किलो और सचिन के सर पर तेल लगाने के बाद उनका सर उस ग्रिल से बहार निकला लेकिन इस घटना के बाद सचिन के घर वाले इतना ज्यादा दर गए की कही वो साइकिल के चक्कर में और कुछ गलत न करदे और फिर क्या थी सचिन के घरवालों ने सचिन को साइकिल दिलवा दी।

Playing It My Way Book Review

सचिन ने जब ACHREKAR सर की अकादमी में क्रिकेट खेलना शुरू किया तो उनके प्रैक्टिस के दौरान 15 मिनट का ऐसा सेशन होता था जिसमे   सर विकेट के ऊपर एक रूपए का सिक्का रखते थे CHALLANGE ये होता था की उस 15 मिनट के सेशन में वो आउट न हुए तो वो सिक्का उन्हें मिल जायेगा।

अब मुश्किल ये थी की हर बॉलर बैट्समैन को आउट करना चाहता था वो सिक्के की प्रतियोगिता जितने के लिए और मैदान में फील्डिंग के लिए लगभग 60 से 70 बच्चे होते थे पर इतना ज्यादा कठिन होने के बावजूद सचिन उन्ही सेशन को करते थे और वो सिक्का उनके लिए सबसे ज्यादा मेन्टल सटिस्फैक्शन और एन्जॉयमेंट होता था।

OTHER THAN CRICKET SACHIN LOVED

सचिन के जीवन में सबस ज्यादा जरूरी क्रिकेट ही रहा और अपने क्रिकेट के अलावा कुछ और रुचिओ के बारे में सचिन अपनी ऑटोबायोग्राफी में बताते है जिसमे सबसे पहला है म्यूजिक। सचिन बताते है की कैसे बचन से ही उनके घर में सबको गाने सुनने का बड़ा शौक था रेडियो पर आने वाले कुछ खास प्रोग्राम्स उनके सब घर वाले इक्कठे होकर सुनते थे उनके बचपन के समय उनके परिवार के लोग और सचिन खुद भी पंकज उदास के गजलों को बड़े शौक से सुनते थे।

Playing It My Way Book Review: सचिन बताते है की परिवार के साथ बैठ कर बैठ कर गाने सुनने के प्यार की वजह से क्रिकेट के बाद म्यूजिक उनका दूसरा लव बन गया और जब सचिन खुद अकेले म्यूजिक सुनने लगे तो उनकी रुचि सभी तरह के इंडियन म्यूजिक की तरफ बढ़ गया और बाद में उन्होंने वेस्टर्न म्यूजिक भी सुन्ना शुरू कर दिया।

इसके अलावा एक और चीज़ जिसको वो और भी ज्यादा पसंद करते है वो है अच्छा खाना अपनी इस ऑटोबायोग्राफी में उन्होंने बड़े अच्छे तरीके से अपने खाना की पसंद के बारे में बताया है और ये भी बताया है की कैसे उन्हें अपनी माँ के हाथ की मछली बैगन का भरता बोहोत ही अच्छा लगता था।

चिकन तंदूरी सचिन का पसंदिता खाना है जो वो बताते है की कैसे वो जब सिर्फ 10 साल के थे तो उनके भाई नितिन ने सचिन को चिकन तंदूरी टास्ते करवाया।

Playing It My Way Book Review in Hindi

अपनी बुक में सचिन ने अपने लव लाइफ के बारे में भी बताया है जिसमे वो अपनी पत्नी अंजलि के उनके जीवन में आने से जुड़ाव और शादी के सभी किस्से बताते है जोकि काफी ज्यादा रोमांचित है और ऐसा लगता ही नहीं है की ये जो लव स्टोरी वो बता रहे है वो उसी महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर की है जो क्रिकेट स्क्रीन पर बोहोत ही शर्मीले नजर आते है।

SACHIN BELIEF IN ALMIGHTY

सचिन अपनी किताब में कुछ घटनाये बताते है जिस से सचिन के बारे में एक और बात पता चलती है जो शायद सचिन के क्रिकेट फंस न जानते हो की वो बोहोत हार्डवर्क करने के बावजूद भगवान् में विश्वास करते है।

एक बार सचिन के परिवार ने ACHREKAR सर को डिनर पर बुलाया पर सबने ये कहकर टाल दिया की वो तब घर पर डिनर के लिए आयंगे जब सचिन स्कूल क्रिकेट मैच में 100 रन का स्कोर करंगे।

Playing It My Way Book Pdf

अगले ही दिन मैच था सचिन बोहोत परेशान थे उनके पिता को उनकी परेशानी दिखाई दे रही थी इसलिए उनके पिता उनके स्कूल मैच से पहले उन्हें गणपति के मंदिर ले गए ताकि वो भगवान का आशीर्वाद ले सके।

Playing It My Way Book Review: सचिन बताते है की उस दिन सचिन उस दिन सिर्फ उसी गणपति मंदिर नहीं गए बल्कि एक और गणपति मंदिर गए जहा वो हर मैच से पहले जरूर जाते थे और वह पर लगे एक पानी के नलके से पानी जरूर पीते थे ऐसा वो हर मैच से पहले करते थे और सचिन ने उस दिन भी स्कूल के मैच से पहले वो किया।

फिर क्या था सचिन की मेहनत और भगवन पर विश्वास की वजह से उन्होंने अपने इस मैच में 100 रनो की पारी खेली और ACHREKAR सर ने अपना वादा निभाया और वो सचिन के घर रात के खाने पर आये।

SACHIN’S LIFE PHILOSOPHY

दोस्तों किताब के शुरुवाती पैराग्राफ में ही सचिन अपने पिताजी के कहे कुछ शब्द बताते है जिनको वो अपने जीवन का एक रास्ता बताते है उनके पिता का सचिन को कहना था जीवन एक किताब की तरह है जैसे किताब में बोहोत से चैप्टर्स होते है वैसे ही लाइफ में भी अलग अलग चैप्टर्स होते है जिसमे सुख और दुःख हार और जीत दोनों तरह के एक्सपीरियंस होते है जैसे बुक का हर चैप्टर आपको कुछ सिखाता है वैसे ही जीवन का हर मोड़ आपको कुछ न कुछ सिखाता है जीवन में मिली हार आपको जीवन में मिली जीत से काफी कुछ ज्यादा सिखाता है।

लेकिन उनके पिता उन्हें कहते थे की क्रिकेट तुम्हारे जीवन का एक हिस्सा है क्युकी तुम्हे पूरे देश को अपना खेल दिखने का सौभाग्य मिला है पर ये हमेशा याद रखना की एक आदमी करीबन 70 से 80 साल जीता है तो ज्यादा से ज्यादा तुम कितना क्रिकेट खेलोगे 20 साल या फिर 25 साल अगर 25 साल भी मानते है तब भी तुम्हारी maturity of life क्रिकेट की दुनिया के बाहर ही बीतेगी।

जिसका मतलब है की लाइफ में क्रिकेट के अलावा भी बोहोत कुछ है तो तुम्हे अपने जीवन में बैलेंस बनाकर चलना है सचिन कहले है की उनके पिता के ये शब्द उनके जीवन में आगे बढ़ने का एक हिस्सा बने जोकि सच में एक बेहतरीन एडवाइस है।

Playing It My Way Book Review

Playing It My Way Book Review: तो दोस्तों ये थे सचिन की ऑटोबायोग्राफी PLAYING IT MY WAY के कुछ रोचक किस्से अगर आप इनकी किताब के और भी किस्सों को डिटेल में जानना चाहते है और सचिन के क्रिकेट कर्रिएर से रिटायरमेंट तक के सभी किस्से जानना चाहते है तो तो सचिन तेंदुलकर के द्वारा लिखी ये किताब जरूर पढ़े लिंक निचे दिया हुआ है आज ही अमेज़न से ख़रीदे

अगर आप भी मेरी तरह सचिन के फैन है तो बाकि आजके इस आर्टिकल में बस इतना ही उम्मीद करता हु सचिन तेंदुलकर की ऑटोबायोग्राफी PLAYING IT MY WAY आपको पसंद आयी होगी इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करे आपका बहुमूल्य समय देने के लिए धन्यवाद।

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