Schlitzie Story in Hindi

Schlitzie Story in Hindi: ये कहानी है ऐसे शक्श की जिसने लोगो को हसना सिखाया शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर होने के बावजूद भी उसने लोगो के दिलो में जगह बनायीं, और जिसने दुनिया को ये भी सिखाया कि खुश रहने के लिए और कामयाबी के लिए सरीर के स्वास्थ्य से भी ज्यादा जरुरी है हमारे मन का खुश होना, चलिए जानते है सचलीट्ज़ी की कहानी हिंदी भाषा में मैं हूँ आपके साथ अजीत ठाकुर स्वागत है आपका ज्ञानवर्ल्ड में चलिए सुरु करते है ।

Schlitzie Story in Hindi

Microcephaly in Hindi

सचलीट्ज़ी का जन्म 10 सितम्बर 1901 में अमेरिका के ब्रॉन्क्स में हुआ तब इसे लोग साइमन मेड के नाम से जानते थे जन्म से ही सचलीट्ज़ी भी किसी अन्य बच्चे की तरह ही दीखता था, लेकिन जैसे जैसे समय बीतता गया ये स्पष्ट होता गया की सचलीट्ज़ी मिक्रोसेफली नामक बीमारी से पीड़ित है ।

एक ऐसी बीमारी जहाँ चेहरा सामान्य दर से बढ़ता है लेकिन सर बहुत ही छोटा होता है या एक आम इंसान के मुकाबले सर आधे के बराबर होता है । इस तुलना में उस इंसान की मस्तिष्क की सोचने समझने की छमता कम हो जाती है कभी कभी ये तब होता है जब बच्चा माँ के पेट में हो और बच्चे की माँ अत्यधिक शराब का सेवन करे या फिर कोई जेनेटिक बीमारी भी हो सकती है और सबसे दुःख की बात ये है की इसका कोई इलाज़ नहीं है ।

सचलीट्ज़ी का जन्म एक अमीर परिवार में हुआ था उसकी एक बहन थी जिसका नाम ाथेलिए था वो भी मिक्रोसेफली से पीड़ित थी अजीब से दिखने वाले इन बच्चों के माता पिता को अपने बच्चो पर शर्म आती थी और वे उन्हें समाज से छिपा कर रखते थे वे डरते थे कि लोग उनका मज़ाक बनाने लगेंगे और इसी कारण की वजह से सचलीट्ज़ी और उसकी बहन को उनके माता पिता ने ड्रीमलैंड साइड शो सर्कस में बेच दिया

जहाँ इन बच्चों को बहुत प्यार और केयर की जरुरत थी वहा वो दोनों एक सर्कस का हिस्सा बन गए थे वही से सुरुवात हुई इन दोनों बच्चो के ज़िंदगी के सफ़र की

Schlitzie Life Success Story

Schlitzie Biography in Hindi: सचलीट्ज़ी एक युवा होते हुए भी उसका दिमाग एक 3 साल के छोटे बच्चे जैसा था वो सिर्फ छोटे छोटे शब्दों को आपस में जोड़कर बोल पाता था सर्कस में साइड शो के दौरान वो हमेशा एक लड़की के कपड़े पहनता था और उन्ही कपड़ो में अपना प्रदर्शन करता और अपनी मासूम हरकतों से लोगो को हसाता था

कभी कभी सचलीट्ज़ी जल्दी ही अपना संयम खो बैठता था इसलिये सचलीट्ज़ी का केयरटेकर अधिकतर उसके साथ ही रहता था धीरे धीरे सचलीट्ज़ी अपनी मासूमियत और अपने फनी नेचर की वजह से दर्शकों और अपने साथियों का चहीता बन गया जो भी उसके संपर्क में आता वो उसकी सादगी और मासूमियत का दीवाना हो जाता था

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सचलीट्ज़ी सर्कस से इस कदर पॉपुलर हुआ कि उसे हॉलीवुड मूवी से ऑफर आने लगे उसके बाद सचलीट्ज़ी ने कई सारी हॉलीवुड मूवीज में काम किया

1932 में सचलीट्ज़ी ने फिल्म फ्रिक्स में अभिनय किया और इसी फिल्म के माध्यम से सचलीट्ज़ी रातों रात एक सुपरस्टार बन गया इस फिल्म में सर्कस में होने वाले प्यार और धोखे को दर्शाया गया था इस फिल्म में कई भड़काऊ और डरावने किरदार भी थे

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Schlitzie Story: 1936 में सर्कस में काम करने वाले जॉर्ज सुरतीस जो वहां के चिम्पैंजी ट्रेनर थे उन्होंने सचलीट्ज़ी को गोद ले लिया जॉर्ज ने 1965 यानि मरते दम तक सचलीट्ज़ी का ख्याल रखा लेकिन जॉर्ज सुरतीस की मौत के बाद जॉर्ज की बेटी ने सचलीट्ज़ी की देखभाल करने से मना कर दिया और उसे लॉस एंजेल्स के एक मेंटल हॉस्पिटल में भेज दिया

सचलीट्ज़ी तीन साल तक मेंटल हॉस्पिटल में रहा और वहां वो हमेशा अपने सर्कस के प्रदर्शन को याद करता था और खुश होता था मेंटल हॉस्पिटल में सचलीट्ज़ी की सही से केयर न होने की वजह से वहां उसकी तबियत खराब होने लगी थी इसलिए उसकी जान पहचान वाले सर्कस के एक दोस्त ने मेंटल हॉस्पिटल से गुजरिश की उसे सचलीट्ज़ी की देखभाल करने के लिए उसे आधिकारिक रूप से सौंप दिया जाये

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और भाग्य से हॉस्पिटल वालों ने सचलीट्ज़ी को उस जादूगर दोस्त को सौप दिया बाद में सचलीट्ज़ी ने डॉक्टरिच नामक सर्कस के साथ काम करना शुरू कर दिया सचलीट्ज़ी का इतना नाम होने के बाद भी उसका कोई अपना अस्थायी घर नहीं था और फिर कुछ सालो बाद सचलीट्ज़ी लॉस एंजेलस से रिटायर हुआ और अपने रिटायरमेंट के दिन भी उसने लोगो का खूब मनोरंजन किया

Schlitzie Story in Hindi

सचलीट्ज़ी अपने आसपास वाले लोगो के लिए हमेशा प्यारा और मासूम था सचलीट्ज़ी की मिक्रोसेफली बीमारी के कारण उसके दिमाग और हड्डियो और पूरे शरीर का पूरी तरह से विकास नहीं हो पाया और इस बीमारी के कारण उसे मिर्गी के दौरे भी आते थे उसकी ये बीमारी इस हद तक बढ़ गयी थी कि बाद में उसे सुनने र देखने में भी परेशानियां होने लगी थी

1971 में 70 साल की उम्र से सचलीट्ज़ी इस दुनिया को अलविदा कहकर चला गया सचलीट्ज़ी की मृत्यु के बाद उसे किसी अनजान कब्र के नीचे दफना दिया गया लेकिन 2007 में सचलीट्ज़ी के एक प्रशंशक ने कहा सचलीट्ज़ी को एक रेस्पेक्टेड पत्थर के नीचे दफनाया जाना चाहिए ताकि लोग उसे हमेशा याद रख सके

दोस्तों सचलीट्ज़ी शारीरिक रूप से अधिक सक्षम भले ही न हो परन्तु कमजोर बिलकुल नहीं था माता पिता की शरण में न रहते हुए भी उसने कभी हार न मानी और दुनिया को हसते हुए वो अपनी एक अलग छाप छोड़ गया

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Comments
  1. 예스벳88

    Love watching movies every morning !

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