टेडी बेयर का नाम लेते ही आँखों के सामने एक सॉफ्ट और प्यारे से खिलोने की तस्वीर दिमाग के सामने आ जाती है। प्रत्येक वर्ष 10 फरवरी को वैलेंटाइन्स वीक के टेडी बेयर के दिन पर पार्टनर एक दूसरे को टेडी गिफ्ट करते है लेकिन क्या आप जानते हैं कि टेडी बेयर का नाम कैसे पड़ा किसने इस खिलोने का नाम टेडी बेयर रखा। इसके साथ एक ऐतिहासिक कहानी जुड़ी हुई है। आइए, जानते हैं कि टेडी बेयर की सम्पूर्ण कहानी-

अमेरिका के 26वें राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट (Theodore Roosevelt) से जुड़ी एक कहानी बहुत मशहूर है। 14 नवंबर 1902 को रूजवेल्ट शिकार करने के लिए गए जहा उन्हें एक भी बेयर शिकार के नहीं मिला। तो उनके सहायक होल्ट कोलीर ने रूडवेल्ट का काम आसान करने के लिए एक काले भालू को पेड़ से बांध दिया, लेकिन रूजवेल्ट ने जब यह देखा, तो उन्होंने उसका शिकार करने से इंकार कर दिया क्युकी उन्होंने उस पेड़ से बंधे और तड़पते भालू को देखा और कहा कि जानवरों का शिकार करना नियमों के खिलाफ होता है और आज मै इस भालू का शिकार नहीं करूँगा।

अमेरिका के राष्ट्रपति का दयाभाव

रूजवेल्ट ने इस भालू को नहीं मारा , लेकिन उन्होंने भालू का चित्र कागज़ पर उतार लिया। इसके बाद 16 नवंबर 1902 को एक कार्टून आर्टिस्ट क्लिफोर्ड बेरिमैन ने इस पूरी घटना का कार्टून बना डाला, जो अमेरिका के एक प्रतिष्ठित अखबार में छप गया। इस कार्टून पर मॉरिस मिकटॉम नाम के एक रूसी शख्स की नजर पड़ी, जो ब्रुकलिन में दिन में टॉफियां बेचा करता था और रात को अपनी पत्नी के साथ मिलकर बच्चों के लिए सॉफ्ट टॉय बनाता था।

अखबार में छपा था भालू का चित्र

इस कार्टून को देखने के बाद मिकटॉम ने बच्चों के खिलौने के तौर पर कपड़े का एक भालू बनाया और अपनी दुकान पर इससे 'टेडी बेयर' के नाम से रखा। उन्होंने इसे टेडी नाम इसलिए दिया क्योंकि थियोडोर रूजवेल्ट का निक नेम टेडी था, और साथ ही उन्होंने एक बेयर यानी भालू की जान बचाई थी। यह टेडी वजन में हल्का और बेहद क्यूट होने के कारण आसानी से लोगों को पसंद आने लगा। वक्त के साथ-साथ टेडी बच्चों की पहली पसंद बन गया और इसे प्यार जताने के लिए कपल्स भी एक-दूसरे को गिफ्ट करने लगे।

रूजवेल्ट के नाम पर बनाया गया सॉफ्ट टॉय